RBI पॉलिसी अक्टूबर 2026: रेपो रेट बढ़ोतरी, EMI और CIBIL

संक्षेप में: RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:00 बजे अपना फैसला सुनाएगी। अभी रेपो रेट 5.25% है और ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों को 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) बढ़ोतरी के साथ 5.50% की उम्मीद है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। ऐसा हुआ तो फ्लोटिंग रेट वाले होम, कार और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है और नई FD पर ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। रेपो रेट से आपका CIBIL स्कोर नहीं बदलता, लेकिन आपको कितनी ब्याज दर मिलेगी, यह आपका CIBIL स्कोर ही तय करता है।
RBI MPC अक्टूबर 2026: मुख्य तारीखें और आंकड़े
| विवरण | स्थिति |
|---|---|
| MPC बैठक | 5–7 अक्टूबर 2026 |
| फैसले की घोषणा | 7 अक्टूबर 2026, सुबह 10:00 बजे |
| गवर्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस | 7 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:00 बजे |
| मौजूदा रेपो रेट | 5.25% (दिसंबर 2025 से अपरिवर्तित) |
| अनुमानित बदलाव | +0.25% से 5.50% |
| ताज़ा CPI महंगाई | 4.82% (अगस्त 2026) |
| पिछली बढ़ोतरी | फरवरी 2023 |
गवर्नर संजय मल्होत्रा फैसले की घोषणा करेंगे, जिसे RBI की वेबसाइट और उसके आधिकारिक YouTube चैनल पर लाइव देखा जा सकता है।
रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद क्यों है?
2025 में कुल 1.25% की कटौती के बाद RBI ने लगातार चार बैठकों में रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखा है। अब हालात बदल रहे हैं:
- बढ़ती महंगाई: अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई (CPI) खाद्य कीमतों के कारण 4.82% पर पहुंच गई।
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: भारत ज़्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ाता है।
- रुपये पर दबाव: कमज़ोर रुपया आयात को महंगा बनाता है।
- दुनिया के केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख: कई बड़े केंद्रीय बैंक दरें सख्त करने की ओर हैं।
Reuters के 61 अर्थशास्त्रियों के सर्वे में 35 ने 5.50% तक बढ़ोतरी का अनुमान लगाया। SBI Research और Nomura ने दिसंबर में एक और 0.25% बढ़ोतरी का अनुमान दिया है, जिससे 2026 के अंत तक रेपो रेट 5.75% हो सकता है।
आपकी EMI पर क्या असर होगा?
भारत में ज़्यादातर नए फ्लोटिंग रेट लोन रेपो रेट से जुड़े (EBLR) होते हैं। रेपो रेट बढ़ने पर बैंक अगली रीसेट तारीख पर ब्याज दर बढ़ा देते हैं।
₹50 लाख, 20 साल के होम लोन पर 0.25% बढ़ोतरी का अनुमानित असर:
| ब्याज दर | मासिक EMI (लगभग) | बदलाव |
|---|---|---|
| 8.00% | ₹41,822 | — |
| 8.25% | ₹42,603 | हर महीने लगभग ₹780 ज़्यादा |
पूरे 20 साल में यह लगभग ₹1.9 लाख अतिरिक्त ब्याज बनता है। कुछ बैंक EMI वही रखकर अवधि बढ़ा देते हैं, जिससे कुल ब्याज और ज़्यादा लगता है।
क्या करें:
- देखें कि आपका लोन रेपो रेट (EBLR) से जुड़ा है या MCLR से, और कब रीसेट होता है।
- अतिरिक्त पैसे हों तो आंशिक प्रीपेमेंट करें।
- संभव हो तो अवधि वही रखें और EMI थोड़ी बढ़वा लें; कुल ब्याज कम लगेगा।
- पुराने MCLR या बेस रेट लोन पर हैं तो रेपो-लिंक्ड लोन में शिफ्ट करने की तुलना करें।
FD निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक आमतौर पर FD दरें बढ़ाते हैं, इसलिए नई FD पर ज़्यादा ब्याज मिल सकता है। पुरानी FD की दर मैच्योरिटी तक वही रहती है। बड़ी रकम को कुछ छोटी FD में बांटना (FD लैडरिंग) फायदेमंद हो सकता है।
आपका CIBIL स्कोर क्यों अहम है?
रेपो रेट आधार दर तय करता है, लेकिन बैंक उसके ऊपर कितना जोड़ेगा, यह आपका CIBIL स्कोर तय करता है:
- 750 या उससे ज़्यादा: आमतौर पर सबसे कम ब्याज दर।
- 650 से 749: लोन मिल सकता है, पर अक्सर ऊंची दर पर।
- 650 से कम: लोन रिजेक्ट हो सकता है या बहुत महंगा पड़ सकता है।
बेहतर स्कोर से मिली 0.5% कम दर, 0.25% रेपो बढ़ोतरी से ज़्यादा बचत करा सकती है। अगले कुछ महीनों में लोन लेना है तो:
- अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियां जांचें और ठीक करवाएं।
- हर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरें।
- क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लिमिट के 30% से कम रखें।
- एक साथ कई लोन या कार्ड के लिए आवेदन न करें।
और पढ़ें: CIBIL स्कोर 600 से 750 कैसे करें और होम लोन के लिए CIBIL स्कोर।
बड़ी तस्वीर: छोटे शहरों में तेज़ी से बढ़ रहा क्रेडिट
5 अक्टूबर 2026 को जारी TransUnion CIBIL और FIDC की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार लोन लेने वालों के 47% लोन NBFC दे रही हैं। पिछले दशक में इनका ग्राहक आधार लगभग 7 गुना बढ़ा है, जिसमें 59% ग्राहक छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से हैं और 27% महिलाएं हैं। 90+ दिन की चूक घटकर 1.1% रह गई है। नए ग्राहकों के लिए समय पर चुकाया गया एक छोटा लोन CIBIL स्कोर बनाने का सबसे तेज़ तरीका है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अक्टूबर 2026 में RBI पॉलिसी की घोषणा कब है?
7 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:00 बजे, और दोपहर 12:00 बजे गवर्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस।
भारत में मौजूदा रेपो रेट कितना है?
रेपो रेट 5.25% है, जो दिसंबर 2025 से नहीं बदला है। किसी बदलाव के लिए 7 अक्टूबर की घोषणा देखें।
क्या रेपो रेट बढ़ने से मेरी होम लोन EMI बढ़ेगी?
अगर आपका लोन रेपो रेट (EBLR) से जुड़ा है तो अगली रीसेट पर EMI या अवधि बढ़ सकती है। MCLR लोन धीरे बदलते हैं।
क्या रेपो रेट बढ़ने से CIBIL स्कोर पर असर पड़ता है?
नहीं। लेकिन ज़्यादा EMI से बजट पर दबाव पड़ सकता है, और कोई भी चूकी हुई किस्त आपका स्कोर घटा देगी।
FD अभी करें या इंतज़ार करें?
बढ़ोतरी के बाद बैंक कुछ हफ्तों में FD दरें बढ़ा सकते हैं। रकम को हिस्सों में बांटकर निवेश करना बेहतर रहता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, वित्तीय सलाह नहीं। दरें और EMI अनुमानित हैं; सही आंकड़ों के लिए अपने बैंक से पुष्टि करें। RBI के फैसले के बाद हम यह लेख अपडेट करेंगे।


